गाँव के अखाड़े से राष्ट्रीय मंच तक
कबड्डी का ज़िक्र प्राचीन भारतीय ग्रंथों और लोक खेलों में मिलता है, जहाँ इसे हु तू तू और सदुगुडु जैसे नामों से खेला जाता था। तमिल के कै पिडि यानी हाथ पकड़ना से कबड्डी शब्द बना। 1918 में इसके नियम पहली बार लिखित रूप में तय हुए, 1938 में भारतीय कबड्डी महासंघ बना, और 1950 के आसपास पुरुषों तथा 1955 में महिलाओं
की राष्ट्रीय चैंपियनशिप शुरू हुई। 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में कबड्डी पदक खेल बना। 2004 में मुंबई में पहला विश्व कप हुआ और 2014 से लीग का दौर चला। पुणे में खेल सामग्री पढ़ने वाले हमारे पाठक रैड और टैकल के मतलब समझने आते हैं; इसी के लिए हमने सिम्युलेटेड कबड्डी क्षेत्र रखा है, जहाँ कोई वास्तविक धन दांव पर नहीं
लगता।
- प्राचीन नाम और शब्द की जड़
- 1918 से 1938 तक नियमों का ढांचा
- विश्व कप और लीग का दौर